Manto Ek Badnaam Lekhak – Book Review

कुछ भी कहने से पहले मै Urdubazaar को आभार व्यकत करना चाहूंगी। इतनी सुन्दर किताब छापने के लिए। मैंने शायद ही मंटो की कहानियों का इतना सुन्दर अनुवाद पहले कभी पढ़ा होगा। शुक्रिया। अगर आप भी हिंदी और उर्दू में खूबसूरत अफसाने पढ़ना चाहते हैं तो इनकी वेबसाइट ज़रूर देखें। मेरा कोड: JAPNEETKAUR  का प्रयोग करने पर आप 10% की छूट भी पा सकते हैं।

मैंने सिर्फ यह अफसाने पढ़े हैं और शायद इनकी समालोचना करने में पूरी तरह सक्षम भी नहीं हूं मगर कोशिश करना चाहती हूं। आशा करती हूं कि आपको मेरा यह प्रयास अच्छा लगेगा। चलिए मंटो के अल्फाज़ॊं से ही शुरू करती हूं।
“मैं अफसाना नहीं लिखता,अफसाना मुझे लिखता है, कभी कभी हैरत होती है कि, यह कौन है जिसने इतने अच्छे अफसाने लिखे हैं?”

क्या आप जानते हैं कि मंटो कोई भी कहानी लिखने से पहले कागज़ पर ७८६ (786) लिखते थे और उसके बाद कहानी लिखी जाती थी? मंटो न ही धार्मिक प्रवत्ति के थे और ना ही आस्तिक। लेखन उनका प्राथमिक और एकमात्र धर्म था और सच को दर्शाना उनके लेखन का मूल उद्देशय। अपने बेबाक और मसखरे अंदाज़, के लिए जाने जाने वाले मंटो की कहानियां पाठक के दिलो-दिमाग पर एक गहरी छाप छोड़ जाती हैं मगर सच की एक खासियत यह भी है कि वो हर किसी को रास नहीं आता और इसी लिए मंटो पर अश्लीलता के कई मुकदमे चले। कई दफा सोचती हूं तो लगता है कि अगर वह आज के समय में जन्मे होते तो शायद उन पर एक भी मुकदमा न चलता (कृपा न्यूज़ चैनल वालों की)।

यह किताब मात्र १४४ (144) पन्नों में मंटो के लेखन की खूसूरती को दर्शाती हैं। किताब की शुरुआत में विनोद भट्ट द्वारा लिखे गए दो निभंद- “बेखौफ बेफिक्रा इंसान” और “786” मंटो के जीवन के कई दिलचस्प किस्से, कहानियां और उनके साहित्य से जुड़ी कई बातों से पाठक को रूबरू करवाते हैं। उसके साथ इस किताब में मंटो के छह बहुत ही दिलचस्प अफसाने भी हैं।

मुझे इन कहानियों में जो चीज़ सबसे ज़्यादा भाई वह थी कि यह किस मोड़ पर खत्म होती हैं। 
“नंगी आवाज़ें” सोसायटी का दो मुहे रवैया और दूसरों की और प्रेम के अभाव को दर्शाती है।
“टोबा टेक सिंह” विभाजन का पागलपन और सत्ता के भूखे लोगों के द्वारा किए गए फैसलों का लोगों के साथ हुई क्रूरता को दर्शाती है।
“धुआं” एक ऐसे विषय पर है जिस पर बात करने में लोग आज भी संकोच करते हैं (LGBTQ)।
“काली सलवार” में मंटो एक सेक्स वर्कर के दृष्टकोण से हमें बहुत सी चीजें विश्लेषण करने पर मजबूर करते है।
“ठंडा गोश्त” मेरी सबसे पसंदीदा कहानी रही। यह मंटो की सबसे प्रसिद्ध कहानियों में से एक है।
“खोल दो” भी देश के बंटवारे के पागलपन को दर्शाती है और यह कहानी पाठक के दिमाग पर एक गहरी छाप छोड़ जाती है।

मैंने यह किताब urdubazaar कि वेबसाइट पर देखी और देखते ही पढ़ने का मन हुआ। यह किताब इतनी खूबसूरत है कि मेरा तारीफ करना इसका अपमान करने जैसा होगा। बस इतना कहूंगी कि आपको यह किताब ज़रूर पढ़नी चाहिए।

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